लोकडाउन के कारन आर्थिक नुकसान झेल रहे निजी कंपनियों को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गयी राहत

पिछले लगभग 50 दिनों से चल रहे लोकडाउन में कोरोना और आर्थिक मंदी के कारन देश बहोत परेशान है ! ट्रांसपोर्ट ना मिलने के कारन हमारे प्रवासी मजदुर पैदल अपनी घर के ओर जा रहे है,  और देश के लगभग सारे कंपनी, फैक्ट्री दुकान सब बंद है लोकडाउन के टाइम पे, केंद्र सरकार ने 29 मार्च को एक सर्कुलर जारी किया था और निजी कंपनियों को निर्देश दिया की वो लोकडाउन के दौरान अपनी एम्प्लॉय को पूरा वेतन दे !

इसपर सुप्रीम कोर्ट ने लोकडाउन के समय में एम्प्लॉय को पूरा वेतन ना दे पाने वाली कंपनियों और कारखानों के खिलाफ केस ना चलने का आदेश दिया है ! सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पुरे देश के प्रशासन को आदेश देते हुए कहा है की वे उन कंपनी पे मुकदमा ना चलाये  जो कोरोना वायरस के कारन बंद के दौरान अपने एम्प्लॉय को सैलरी नहीं दे पा रहा हो !

 

कंपनियों ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका लगाया था जिसमे उन्होंने यह दवा करते हुए सुप्रीम कोर्ट चली गयी की उनके पास भुकतान करने का कोई उपाए नहीं है ! क्युकी लोकडाउन के कारन उत्पादन में पूरी तरह ठप है !  याचिका करता ने मांग करते हुए कहा की, लोकडाउन के कारन उनके कर्मचारियों को सैलरी देने से पूरी तरह छूट दी जाये ! ये याचिका मुंबई और पंजाब के कुछ व्यापारियों ने लगाया था

 

इसपर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगे है ! इसपर जस्टिस एल. नागेस्वरा राओ , जस्टिस बी. आर. गवई और जस्टिस संजय किशन कौल के पीठ ने राज्य और केंद्र दोनों सरकारों से प्राइवेट कंपनियों फैक्टरियों के खिलाफ केस ना चलाने को कहा सुप्रीम कोर्ट ने कंपनियों की ओर से केंद्र से जवाब माँगा है

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