Panipat movie review, rating, and realease date

पानीपथ एक एपिक युध की फिल्म  है  जो 6 दिसम्बर 2019 को सिनेमा घरो मे  लग  चुकी  है  इस फिल्म के  लेखक अशोक चक्रधर जी  है  इन्होने ही  इस फिल्म के  dilogue  लिखे है आशुतोष गोवारिकर इस फिल्म के  डायरेक्टर है  और  इस  फिल्म  का  प्रोडक्शन  सुनीता  गोवारिकर  एंड  रोहित  शैलतकार ने  किया  है  प्रोडक्शन  कंपनी  आशुतोष  गोवारिकर प्रोडक्शंस  एंड  विज़न  वर्ल्ड  फिल्म्स  है

 

ये  फिल्म  हिंदी  भाषा  मे  बनाई  गयी  है  इस  फिल्म  मे  म्यूजिक  अजय-अतुल  ने  दिया  है  इसका  म्यूजिक  बहुत  ही  अच्छा  है  ये  फिल्म  लगभग  175 -180 मिनट्स  की  और  इसे   बनाने मे  लगभग  100 करोड़  का खर्चा  आया  है  इसके  ग्राफ़िक  भी  बहुत  मजेदार  है  इस  फिल्म  के  रेविएवस  बहुत  अच्छे  आ  रहे  ये  फिल्म  इंडिया  में  लगभग  2500 -2550 स्क्रीन्स  पर  ही  रिलीज़  हुयी  है

इस फिल्म  मे  अर्जुन  कपूर , सदाशिव  रओ  भाऊ के  रोले  मे  है  कृति  सानों  इनकी  वाइफ पारवती  बाई  के  रोले  में  दिखी  और  मोहनीश बहल नाना  साहब  पेशवा  के  रोले में  नजर  आये  जोकि  मराठो  के  महाराजा  है  और  सदाशिव  उनके  सेना  नायक  है  संजय  दत्त इस  फिल्म  में  अहमद  सह  अब्दाली  के  किरदार  में नजर  आये  है  जो  की  अफग़ान के  है  !

 

इस  फिल्म  की  कहानी  कुछ  इस  प्रकार  है  की  पेशवा  बहाजी  रओ  के  मरने  के  बाद  मराठो  की  कमान  सदाशिव  रओ  के  हाथो  मे  आ  जाती  है  सदाशिव  पुंजा  को  जीत  कर मराठा  साम्राज्य  मे  मिला  लेता  है  और  मराठा  साम्राज्य  को  अफगानिस्तान   की  सिमा  तक  फैला  देते  है  सदाशिव  50000 सैनिको  के  साथ  पश्चिम  मे  लड़ने  चले  जाते  है  और  कई  राज्यों  पर  जीत  हासिल  करते  है  मराठो  की  बढ़ती  तखत  को  देख  कर उनके  कई दुसमन  भी  बन  जाते  है  उधर  अहमद  सह  अब्दाली  दिल्ली  पर आक्रमण  कर  देता  है  और  जीत  भी  लेता  है  इसका  समाचार  सुनते  ही  दिल्ली  की  तरफ 50000 सैनिक  और  निगरॉक  के  कुछ  करते  कई  दिनों  का  सफर  करने  के  बाद  दिल्ली  पहुंचते  है  और  जाट  राजा  सूरज  मल  के  साथ  मिलकर  अटैक  कर  देते  है  और  जाट  राजा  सूरज  मल  की  सहायता  से  दिल्ली  से  अहमद  सह  अब्दाली  की  सेना  को  खदेड़  देते  है  और  उससे  काबुल  भी  जीत  लेते  है

 

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इसके  बाद  सूरजमल  अपनी  सेना  के  साथ  अपने  राज्य  लोट  जाते  है  कुछ  समय बाद  अहमद  सह  अब्दाली  डबल  सेना   लेकर  आता   है  उस  समय  बहुत  बारिस  होती  है  जिससे  यमुना  अपने  उफान  पर  रहती  है  बारिस  से  पहले  भारत  मे  सूखा  पड़  जाती  है  तो  मराठो  के  पास  खाने  की  कमी  हो  जाती  है  क्युकी  उनका  संपर्क  दिल्ली  से  नहीं  हो  पता  और  उन्हें  कई  नबाब  धोका  दे  देते  है  और  मराठे  इस  बार  किसी  और  भी  हिन्दू  राजा  से  भी  हेल्प  नहीं  लेते  है  यहातक  की  जाट  राजा  सूरजमल  से  भी  नहीं  जिसके  साथ  मिलकर  वो   पहले  युध  में  जीते  थे  बारिस  के  चलते  यमुना  भी  अपने  उफान  पर  रहती  है  और  ठण्ड  भी  बढ़  जाती  है  उफान  सूखते  ही  दोनों  सेना  आमने  सामने  होती  है  अहमद  साह अब्दाली की  अच्छी  जानकारी  होती  है  इसलिए  वो  अपनी  सेना  को  मोटे  सर्दी  के  कपड़ो  मे  लाता है  जबकि  मराठे  पतली  धोती  मे  ही  युद्ध  लड़ते  है  पर डे   40000 सैनिक  मारे  जाते  है.

एक  तो  खाने  की  कमी  ऊपर   से  ठण्ड  फिर  भी  मराठा  सैनिक  भूखा  मरने  के  बजह   लड़कर  मरना  पसंद  करते  है  भीषण  युद्ध  होता  है  मराठो  का  साहस और उनकी  वीरता  अहमद  की  सेना  पर  भारी पड़  रहे  होते  है  तभी  अचानक  सदाशिव  के  भाई  को  गोली  लग  जाती  है  तो  सदाशिव  भाबुक  होकर  अपना  हाथी  छोड़   के  घोड़े  पर  सवार  होकर  भाई  की  तरफ  भागते  है  उन्हें  हाथी  पर  न  पाकर  सोचते  है  की  सदाशिव  वीरगति  को प्राप्त  हो  गए है  इससे  सेना  इतर  वीतर  हो  जाती  इन  सभी  कारणों   के  कारन  पानीपत  की  3rd (तीशरी)  जंग मराठा  लास्ट  मे  हार जाते  है !

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